Monday, December 26, 2011

We Shall Find Out

पता लगाएंगे


धुआं-धुआं आकाश हुआ क्यों ? पता लगाएंगे.

धरती रेगिस्तान बनी क्यों? पता लगाएंगे

गंगा जल गन्दा किस कारण ? पता लगाएंगे

ढूंढो, कहाँ छुपे हैं रावण? पता लगाएंगे



पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, नज़र दौड़ाएंगे

एटम के अन्दर झांकेंगे, अक्ल लड़ाएँगे



सूरज-मंडल में राहों का, जाल बिछाएंगे

अर्थ, मून और मार्स, मरकरी, आएं जाएंगे



परबत, जंगल, झीलें, नदियाँ, सहज बचाएंगे

हर प्राणी की रक्षा होगी, बिगुल बजाएंगे



तितली, चिड़िया बिल्ली, बन्दर, शेर बचाएंगे

सब पेड़ों की, सब पौधों की, जड़ें जमाएंगे



झर-झर झरने निर्मल जल के, प्यास बुझाएंगे

सर-सर झौंके शुद्ध हवा के, फूल खिलाएंगे



जादू, टोने, भूत, प्रेत, सब, दूर भगाएंगे

सांइस अपना साधन होगा, यह समुझाएंगे



हर ज़ालम, हर रावण की हम, लंका ढाएंगे

नहीं चलेगी तानाशाही, साफ बताएंगे



मातु-पिता-गुरु, सब पुरखों को, शीश झुकाएँगे

सांइस वाले दावर जी को, नहीं भुलाएंगे.

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बलदेव राज दावर

२०.१२.२०११

Thursday, December 15, 2011

साइंस धर्म

साइंस धर्म


(A Truly Human Religion)


पिछले चार-पांच हज़ार सालों में, आम तौर पर, और पिछले चार-पांच सौ सालों में, खास तौर पर, मानव जाति ने प्रकृति को ध्यान से देखने और परखने के बाद जो जानकारी और सूझ-बूझ संचित की है उसे साइंस कहते हैं इस साइंस ने अब तक जो खोजें की हैं उनसे पता चलता है कि हमारी दुनिया को किसी ने बनाया नहीं। किसी ने जान-बूझ कर उसे गढा नहीं कोई एक समझदार सुपर पॉवर है जो उसे चला रही है यह दुनिया जंगली घास की तरह अपने आप उगी है और अपने-आप ही वह फल-फूल रही है एक नदी की तरह वह अपना रास्ता स्वयं बना लेती है जिधर निचान होती है उधर, चाहे-अनचाहे, चल पढ़ती है


आधुनिक साइंस का मानना है की आज से 13.8 अरब साल एक महा विस्फोट के साथ हमारी सृष्टि का जन्म हुआ था। सृष्टि तब आग का एक अति विशाल और अति प्रचंड शोला थी जल्दी ही उस शोले की कुछ लपटें ठंडी हो कर गैस के बगूलों में ढ़ल गईं। इस गैस के अनगिनत विशाल बगूलों से अरबोंखरब तारों का गठन हुआ तारों के गर्भ नए-नए तत्वों का निर्माण हुआ जिस तारे को हम सूरज कहतेp हैं उसका गठन आज से लगभग पाँच अरब सालपहले हुआ। गैस और धूल के जिस बगूले से सूरज बना उसके बचे मलबे से वृ













Wednesday, December 14, 2011

Violence

There are statistics to prove that the rate of incident of fratricide among humans has come down over the centuries. Why?  I think this has happened not because of civilization or policing but because human groupings have become larger and larger in size over the last couple of millennia - from tribes to kingdoms and from kingdoms to nation states. The propensity to violence has been, sort of, delegating from individuals to the group and from smaller groups to the larger group. Modern nation states are much more violent and murderous than their constituents, the citizens. Look at the mass murders heroically committed by nation states such as Germany and USA in the last 70 odd years. In the coming decades, I hope, the religion and nationalism that now divide the world into small fragments will decline and mankind will unite into one single group. The incidence of violence will then come down remarkably and we shall ferociously fight the lethal threats that are looming large over our global well being.