साइंस धर्म
(A Truly Human Religion)
पिछले चार-पांच हज़ार सालों में, आम तौर पर, और पिछले चार-पांच सौ सालों में, खास तौर पर, मानव जाति ने प्रकृति को ध्यान से देखने और परखने के बाद जो जानकारी और सूझ-बूझ संचित की है उसे साइंस कहते हैं। इस साइंस ने अब तक जो खोजें की हैं उनसे पता चलता है कि हमारी दुनिया को किसी ने बनाया नहीं। किसी ने जान-बूझ कर उसे गढा नहीं। न कोई एक समझदार सुपर पॉवर है जो उसे चला रही है। यह दुनिया जंगली घास की तरह अपने आप उगी है और अपने-आप ही वह फल-फूल रही है। एक नदी की तरह वह अपना रास्ता स्वयं बना लेती है जिधर निचान होती है उधर, चाहे-अनचाहे, चल पढ़ती है।
आधुनिक साइंस का मानना है की आज से 13.8 अरब साल एक महा विस्फोट के साथ हमारी सृष्टि का जन्म हुआ था। सृष्टि तब आग का एक अति विशाल और अति प्रचंड शोला थी। जल्दी ही उस शोले की कुछ लपटें ठंडी हो कर गैस के बगूलों में ढ़ल गईं। इस गैस के अनगिनत विशाल बगूलों से अरबोंखरब तारों का गठन हुआ। तारों के गर्भ नए-नए तत्वों का निर्माण हुआ। जिस तारे को हम सूरज कहतेp हैं उसका गठन आज से लगभग पाँच अरब साल। पहले हुआ। गैस और धूल के जिस बगूले से सूरज बना उसके बचे मलबे से वृ
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