Sunday, November 13, 2011

Let Us go to Mars and settle there

चलो मंगल चलें


आबादी इतनी बढ़ गई है/ यह दुनिया छोटी पड़ गई है/

चल मंगल पे बस जाएं हम/ इक दुनिया नई बसाएँ हम//

यहाँ भीड़-भड़का भारी है/ धक्के पर धक्का जारी है/

यहाँ गिर कर उठना मुश्किल है/ पैरों को कहां जमाएँ हम//

कम रोटी है, कम पानी है/ आपस में खींचा-तानी है/

सब लड़ते और झगड़ते हैं/ रूठे किस भान्त मनाएं हम//

है मंगल खाली पड़ा हुआ/ अरबों सालों से बिना छुआ/

अनगिनत खेत-मैदान वहां/ कोई सीडी चलो लगाएं हम//

कहते हैं इक मुनि नारद थे/ वे ग्रह-नक्षत्र विशारद थे/

मंगल भी जाया करते थे/ कुछ उनसे पता लगाएं हम//

नारद की कथा पुरानी है/ शायद वह सिर्फ कहानी है/

उस की भी खोज करें लेकिन/ अपनी भी अक्ल लड़ाएं हम//

आओ इक लम्बा तख्ता लें/ उसे चंदा के ऊपर धर दें/

लम्बा हिस्सा धरती की तरफ/ छोटा उस पार जमाएं हम//

जाने वाला उस पार रहे/ झटके के लिए तैयार रहे/

इस तरफ भीड़ का भार रहे/ जिसे इक-दम धाड़ गिराएं हम//

जाने वाला उड़ जाएगा/ मंगल पर पहुंचा पाएगा/

इक-इक कर के, दो-दो कर के/ लाखों को वहां पहुचाएं हम//

जो मंगल पर बस जाएँगे/ हीरो हीरो कहलाएँगे/

और बाकी जो रह जाएँगे/ भर पूरा राशन पाएं हम//

- बलदेव राज दावर

1 Comments:

At December 5, 2011 at 7:04 AM , Blogger Fani Raj Mani CHANDAN said...

Very beautiful composition, a shortcut to land on mars :-)

Regards
Fani Raj

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home